Created on 17 May 2012

To, Shri Manmohan Singh ji, The Honable Prime Minister of India, New Delhi. Sub: Justice and compensation for the victims of the Hashimpura Massacre of 1987 and adequate representation of Muslims in Para Military services of the nation. Honable Prime Minister, It has been 25 years since the most gruesome massacre of Hashimpura took place on May 22, 1987. Several PAC Jawans are still being tried for the shooting and killing of 42 Muslims in Meerut. Justice has eluded the Hashimpura victims in the Courtrooms of Uttar Pradesh and Tis Hazari where the case is still pending.

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Created on 17 May 2012

: मुख्य शासन सचिव ने पीसीपीएनडीटी को लेकर दिए दिशानिर्देश : बाडमेर। पीसीपीएनडीटी अधिनियम को कठोरता से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने सख्ती बरतते हुए सभी जिलाधिकारियों को सतर्कता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कन्या भ्रूण हत्या रोकने को लेकर दृढ़संकल्पित राज्य सरकार ने विभिन्न निर्णय लेते हुए बुधवार को हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिशानिर्देश दिए। मुख्य शासन सचिव की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने को लेकर अहम निर्णय लेते हुए सरकार ने सभी अधिकारियों को कहा है कि अब भविष्य में जब भी विवाह पंजीयन हो, वहां संबंधित दंपति से शपथ पत्र लें कि वे लिंग की जांच नहीं करवाएंगे और न ही कन्या भ्रूण हत्या करेंगे। इसके अलावा जिलास्तर पर एक एडवाईजरी कमेटी बनाने के आदेश दिए गए हैं, जिसकी एक निर्धारित तिथि को बैठक होगी और बैठक में मासिक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। वहीं सोनोग्राफी करवाने वाली प्रत्येक गर्भवती की टेकिंग की जाएगी कि कहीं उसने अन्य संस्थान पर जाकर भ्रूण हत्या तो नहीं करवाई। इसके साथ ही एमटीपी करने वाले प्रत्येक निजी चिकित्सालयों की जांच भी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

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Created on 17 May 2012

आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह घिरी सरकार! सब्जी, मीट, दूध तथा दाल की कीमतों में उछाल के बीच आम आदमी के लिए बुरी खबर है। महंगाई ने एक बार फिर रंग दिखाना शुरू कर दिया है। छह महीने बाद खाद्य महंगाई एक बार फिर दहाई अंकों में पहुंच गई और अप्रैल में यह 10.49 फीसदी रही। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक महंगाई दर पिछले महीने के मुकाबले आधा फीसदी बढ़ गई है। महंगाई बढ़ने के साथ ही, ब्याज दरों में गिरावट की उम्मीद भी खत्म हो गई है। एक ओर भारतीय रिजर्व बैंक धीमी पड़ती आर्थिक विकास दर को गति देने और बढ़ती महंगाई को काबू पाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इसका असर आंकड़ों पर फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है। जाहिर है कि महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस पर तुर्रा यह कि एलआईसी समेत बैंकों की रेटिंग भी घट गयी है। अब रिजर्व बैंक के सामने मौद्रकि नीतियों में सख्ती बरतने के सिवाय कोई चारा नहीं है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने खाद्य मुद्रास्फीती में आई तेजी पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार इसे नियंत्रित करने के हर संभव उपाय करेगी।

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Created on 17 May 2012

संसद में हंगामा तो बरपा पर इससे सौंदर्य प्रसाधन बाजार की मार्केटिंग के आक्रामक तेवर बदलने की उम्मीद कम है। हालांकि सौंदर्य उद्योग के लिए बुरा समय है। महिलाओं को केद्रित कर उन्हें उपभोग की वस्तु की रूप मे दिखाए जाने वाले विज्ञापनों और उन्हें प्रसारित करने वाले टीवी चैनलों पर गाज गिर सकती है। लोकसभा मे मंगलवार को हर ओर से ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ आवाज उठी। टीवी पर आपत्तिजनक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए विभिन्न दलों की राय ली जाएगी। इसके लिए सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाएगी। सूचना-प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने लोकसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल में यह जानकारी दी। सोनी ने बताया कि इस संबंध में मंत्रियों का एक समूह बनाया गया है। यह समूह सभी पहलुओं पर विचार कर रहा है। इससे पहले विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस बैठक का सुझाव दिया था। उनके मुताबिक विपक्षी दल इस बैठक में न केवल अपनी राय देंगे बल्कि सरकार को सहयोग भी करेंगे।

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Created on 17 May 2012

हमारे सांसदों के लिए एक ऐसा प्रशिक्षण सत्र चलाये जाने की आवश्यकता इधर शिद्दत से महसूस होने लगी है, जिसमें उन्हे तथ्यगत ढ़ॅंग से यह पाठ पढ़ाया जाय कि इस देश की गरीब जनता के वोट से जीते हुए वे भी हांड-मांस से बने आदमी ही हैं, देवी-देवता नहीं! इस देश का संविधान अगर उन्हें हर माह एक मोटी तनख्वाह और राजाओं जैसी तमाम सुविधाऐं देता है (सच कहें तो उन लोगों ने खुद ही ले लिया है) तो वह महज इसलिए कि वे गरीब जनता के बीच रहकर उसका दुःख-दारिद्रय दूर करने का प्रयास करें न कि खुद को भगवान घोषित करें। उनकी समझ में यह भी बैठाये जाने की आवश्यकता है कि हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है, तानाशाह नहीं और एक लोकतांत्रिक देश में किसी भी नागरिक को अपने विचार प्रकट करने का अधिकार ठीक उसी प्रकार है जैसे संसद व विधान सभाओं में देश के जनप्रतिनिधियों को। ये हमारे जन प्रतिनिधि अगर अगर सदन में गाली-गलौज, धक्का-मुक्की, मारपीट और तोड़-फोड़ कर सकते हैं तो क्या देश की जनता को इसकी आलोचना करने का भी हक़ नहीं है?

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Created on 16 May 2012

आजकल पूरे मीडिया जगत में दलाली व भडुआगिरी से हाहाकार मचा हैं. पढ़ा-लिखा, अनुभवी, पत्रकारिता की डिग्री धारक पत्रकार इस दलालगिरी से बहुत ज्यादा त्रस्त है. पढ़े-लिखे अनुभवी पत्रकारों में फेस बुक पर दलालिता व भडुआ संस्कृति पर घंटों गुजर जाते हैं चूंकि कभी किसी दौर में बुद्धिजीवी तबका कहे जाने वाले पत्रकार को अब दलाल की उपमा दी जाने लगी हैं. बड़े-बड़े समाचार पत्रों व बड़े टीवी चैनलों में दलाल संस्कृति सबसे ज्यादा दिखाई देने लगी हैं, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि लोकतंत्र का मंदिर कहे जाने वाले इस भारत वर्ष में चौथे पहिये में दलाली व भडुआगिरी कहाँ तक उचित हैं. इस बात पर कोई ध्यान देने वाला नहीं हैं. भड़ास४मीडिया पिछले चार सालों में भारत के स्ट्रिंगरों की सबसे बड़ी आवाज के रूप में उभर कर आया है, जो कि स्ट्रिंगर की हालत बहुत बढिया बयान करता है.

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Created on 16 May 2012

2008 के अगस्त महीने में आजमगढ़ के अबुल बशर की गिरफ्तारी और उसके बाद सपा के अबू आसिम आजमी और इमाम बुखारी की खरेवां मोड़ सरायमीर पर की गई आम सभा और उसके बाद बसर के घर पहुंच सान्त्वना देते हुए इस जुल्म की खिलाफत करने के बयानों की याद दिलाते हुए मानवाधिकार नेता मसीहुद्दीन संजरी कहते हैं कि अब वक्त आ गया है कि सपा अपने दिए वादों को पूरा करे। तो वहीं बशर के भाई अबू जफर कहते हैं कि आखिर में जब भाई कि गिरफ्तारी 14 अगस्त 2008 को हुई थी, जिसकी खबर 15 अगस्त 2008 के अखबारों में भी आई थी और फिर पुलिस ने उन्हें 16 अगस्त को लखनऊ से गिरफ्तार करने का दावा किया था, तो ऐसे में आज सपा सरकार अपने वादे को पूरा करे और मेरे भाई की गिरफ्तारी की जांच करवाए।

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Created on 16 May 2012

१५ माह बाद जमानत पर तिहाड़ से बाहर आए पूर्व दूरसंचार मंत्री एवं द्रमुक सांसद ए.राजा ने जिस बेपरवाही से अपने समर्थकों की ओर चुम्बन उछाला, वह उनकी सनक तथा "जो किया ठीक किया" की मानसिकता को दर्शाता है। २जी स्पेक्ट्रम घोटाले में २०० करोड़ की रिश्वत लेने के आरोपी राजा को दिल्ली की एक अदालत ने सिर्फ इसलिए जमानत दी क्यूंकि इस मामले से जुड़े १३ अन्य अभियुक्तों को पूर्व में जमानत मिल चुकी है। इस मौके पर द्रमुक कार्यकर्ताओं ने ऐसे खुशियाँ मनाई मानो राजा किसी जंग को जीत कर लौट रहे हों। राजा तो राजा; उनकी ख़ास "प्रजा" की आँखों में देश के साथ गद्दारी करने के लिए शर्म का नामों निशान तक नहीं था। हालांकि अदालत ने राजा को सशर्त जमानत दी है किन्तु सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब २जी स्पेक्ट्रम घोटाले से जुड़ी जांच का क्या होगा? क्या अब जांच की निष्पक्ष उम्मीद की जानी चाहिए? क्या राजा अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मुद्दे को कमजोर नहीं करेंगे? क्या जमानत मिल जाने से राजा पर लगे तमाम दाग स्वतः धुल जायेंगे?

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Created on 16 May 2012

बोलने और सुनने में बड़ा प्यारा लगता है कि ‘‘शिक्षा वही, जो सच्चा इंसान बनाए’’, लेकिन क्या ऐसा कभी संभव है? समाज और राज के चरित्र में दिनों-दिन क्षरण जारी है। उनका नैतिक क्षरण बहुत तेजी से हो रहा है। जिन पर कानून बनाने की जिम्मेदारी है, वही घोड़े की तरह बिक रहे हैं। इस खरीद-फरोख्त के रेस में वे गर्व से शामिल होते हैं। तनिक लज्जा नहीं कि मनुष्य होकर भी जानवरों की तरह बिकते हैं। ये कैसी विडंबना है? पिछले माह पूरे देश के जनमानस में निर्मल बाबा द्वारा की गयी ठगी की चर्चा छायी रही, तो राँची में संजीवनी बिल्डकॉन की। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों के मूल में, ठगी में साथ देने वाले कारपोरेट मीडिया ही रही।

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Created on 16 May 2012

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और वर्तमान में सरकारी संस्था ‘भारतीय प्रेस परिषद’ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने विगत दिनों अपने एक आलेख में 90 फीसदी भारतीयों को मूर्ख बताया। वे उदाहरण भी उन्होंने गिनाए हैं जिनके आधार पर उन्होंने ऐसा कहा। इस पर लोग दो खेमों बंट गये हैं। दोनों ही खेमों से जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आयीं हैं, कोई उनकी बातों को सही बता रहा है तो कोई उन्हें अहंकारी बता रहा है। उन्होंने जो कारण बताए हैं वे मुख्यतः अंधविश्वास, सांप्रदायिकता और सामंतवाद-रूढीवाद से जुड़े हैं। काटजू को उनकी विद्वता, बेबाकी और साहस के लिए जाना जाता है। उनकी बातों को लोग गंभीरता से लेते भी हैं। उन्होंने जिन 90 प्रतिशत लोगों को मूर्ख बताया है, वे निम्न और मध्य वर्ग के होंगे। इन्हें काटजू की बात को गंभीरता से लेना चाहिए और आत्मनिरीक्षण करते हुए जरूरी सुधार अपने में करना चाहिए। अंधविश्वास के कारण समाज काफी बुरी दशा में है, लेकिन इसे दूर करने का प्रयास किसी भी स्तर पर गंभीरता से व्यापकता में नहीं हुआ है। काटजू के बहाने यह काफी चर्चा में हैं इस पर बहस और तेज होनी चाहिए।

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Created on 16 May 2012

दो बच्चों की लाश अहमदाबाद में आसाराम बापू के आश्रम में मिली तो बीजेपी सरकार ने आश्रम तहस नहस करा दिया.. बापू की तो मानो रीढ़ तोड़ दी... एक लाश गडकरी के घर में मिली तो उसे बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया.. वाह रे बीजेपी वालों... अच्छा चलना पेश किया.. 2014 में जनता जवाब मांगेगी... क्या अब भी समझ में नहीं आ रहा कि क्षेत्रीय पार्टियां क्यों मज़बूत हो रही हैं... बीजेपी कांग्रेस का विकल्प क्यों नहीं बन पा रही है।

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Created on 15 May 2012

आज हम हमारी संसद के 60 वर्ष पूर्ण होने का जश्न मना रहे हैं, भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव हासिल है। जहां आजादी के बाद हमारे पड़ोसी देशों में निरंकुश व सैन्य शक्ति के सामने लोकतंत्र ने दम तोड़ दिया वहीं भारत में प्रतिकूल परिस्थितयों में भी लोकतंत्र ने अपनी मजबूती बनाये रखी। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते गये हमारा लोकतंत्र भी मजबूत होता गया। इतनी विषमताओं के बावजूद भी भारत में लोकतांत्रिक प्रणाली निष्‍पक्ष है, इसमें सभी वर्गों व समाज की भागीदारी है। भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का लोहा आज संपूर्ण विश्व मानता है, लेकिन जिस प्रकार सिक्के दो पहलू होते हैं, उसी प्रकार सफलता के दो पहलू होते हैं सकारात्मक व नकारात्मक और सफलता को सुदृढ बनाने के लिये ये आवश्यक है कि हम अपने नकारात्मक पहलुओं की खुली चर्चा करके इसके समाधान का उपाये करें यहीं जनतंत्र की विशेषता भी है।

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Created on 15 May 2012

कल 'सत्यमेव जयते' देख रहा था. हरीश अय्यर को देख थोड़ा अटपटा लगा. अभी अभी दो हफ्ते पहले उन्हें 'ज़िन्दगी लाइव' में देखा था-गे स्पेशल में.. वहां ये कह रहे थे कि बचपन से ही उन्हें और लड़कों की तुलना में थोड़ा अजीब फील होता था. १५ साल की उम्र में ही उन्हें इसका एहसास हो गया. उसके बाद ही उन्होंने ये तय कर किया कि वो जैसे हैं वैसी ही जिंदगी जियेंगे और अपने घरवालों को भी बताएँगे. मुझे याद है ऋचा अनिरुद्ध के एक सवाल के जवाब में उन्होंने बड़ी साफगोई से कहा था- I love men and whats wrong in it. As of now i love a man and he loves me too. We are in a happy relationship. I' m very happy. उनकी माँ भी वहां थी. और उन्होंने भी कई बातें बतायी. कहा ह‍ि ये हमेशा हमसे कुछ कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पाता था और हम समझ नहीं पाते थे.

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Created on 15 May 2012

: लोगों की भावनाओं को बेच रहा है अभिनेता : वाह, बॉलीवुड स्टार आमिर खान के शो सत्यमेव जयते ने टीवी पर धूम मचा रखी है। आमिर खान ने अपनी पब्लिसिटी का नया ही फार्मूला खोज निकला है। सच ही कहा है कि आमिर अपनी पब्लिसिटी के लिए हमेशा कुछ अलग ही करने को कोशिश करते हैं और अब वो सत्यमेव जयते में लोगों के सामने लोगों की पर्सनल समस्या को भुनाने में लगे हैं। कभी भ्रूण हत्या पर तो कभी बच्चों के यौन शोषण पर बस यही बाकी था। ऐसे मुद्दों को उठाकर आमिर खान लोगों की नज़रों में रीयल हीरो बनने की कोशिश कर रहे हैं और इस के साथ आमिर लोगों की भावनाओं से खेलकर पैसे जुटाने में लगे हैं। जानकारों के अनुसार आमिर खान को सत्यमेव जयते के प्रति एपिसोड के लिए 3 करोड़ रुपया मिलेगा। महीने में कभी चार तो कभी पांच एपिसोड प्रसारित होंगे इस लिहाज से सत्यमेव जयते उन्हें हर महीने 12 से 15 करोड़ की मोटी कमाई करवायेगा।

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यह संसार

Justice and compensation for the victims of the Hashimpura Massacre of 1987
To, Shri Manmohan Singh ji, The Honable Prime Minister of India, New Delhi. Sub: Justice and compensation for the victims of the Hashimpura Massacre of 1987 and adequate representation of Muslims in Para Military services of the nation. Honable Prime Minister, It has been 25 years since the most gruesome massacre of Hashimpura took place on May 22, 1987. Several PAC Jawans are still being tried for the shooting and killing of 42 Muslims in Meerut. Justice has eluded the Hashimpura victims in the »
विवाह पंजीयन से पहले देना होगा कन्‍या भ्रूण हत्‍या न करने का शपथ पत्र
: मुख्य शासन सचिव ने पीसीपीएनडीटी को लेकर दिए दिशानिर्देश : बाडमेर। पीसीपीएनडीटी अधिनियम को कठोरता से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने सख्ती बरतते हुए सभी जिलाधिकारियों को सतर्कता से कार्य कर »
महंगाई और आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह घिरी सरकार, एलआईसी की रेटिंग भी घटी
आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह घिरी सरकार! सब्जी, मीट, दूध तथा दाल की कीमतों में उछाल के बीच आम आदमी के लिए बुरी खबर है। महंगाई ने एक बार फिर रंग दिखाना शुरू कर दिया है। छह महीने बाद खाद्य महंगाई एक बा »

माया महाठगिनी

क्‍या दलाली पत्रकारिता को खतम कर देगी?
आजकल पूरे मीडिया जगत में दलाली व भडुआगिरी से हाहाकार मचा हैं. पढ़ा-लिखा, अनुभवी, पत्रकारिता की डिग्री धारक पत्रकार इस दलालगिरी से बहुत ज्यादा त्रस्त है. पढ़े-लिखे अनुभवी पत्रकारों में फेस बुक »
सामुदायिक रेडियो को बरबाद कर देना चा‍हती है सरकार!
सरकार का एक हाथ क्या कर रहा है, बहुत बार दूसरे को खबर नहीं होती। ऐसे में सबकुछ ठीक-ठाक चलता रह सकता है मगर हमेशा नहीं। अनेक बार दोनों हाथ इक दूजे के खिलाफ भी उठ खडे़ होते हैं। सामुदायिक रेडियो स् »
मीडिया क्‍लब पीलीभीत का गठन, तारिक अध्‍यक्ष एवं अक्षय महामंत्री बने
पीलीभीत जिले के सक्रिय पत्रकारों ने पत्रकार हितों को ध्‍यान में रखते हुए मीडिया क्‍लब पीलीभीत का गठन किया है. पिछले दिनों पीलीभीत के निर्मल होटल में पत्रकारों ने बैठक कर इस क्‍लब के गठन का नि »

दम ले-ले घड़ी भर

वरिष्‍ठ पत्रकार देव प्रकाश चौधरी ने लिखी 'एक था लादेन'
पहली बार हिंदी में लादेन पर एक किताब आई है, जिसके लेखक हैं-वरिष्ठ पत्रकार और चित्रकार देव प्रकाश चौधरी। किताब का शीर्षक है-एक था लादेन। इस किताब में दुनिया के सबसे कुख्यात खलनायक लादेन की जिंद »
बिहार राज्य जसम का 9वाँ राज्य सम्मेलन : दिखीं श्रमजीवी जनता की सच्‍चाइयां
‘विकल्प’ अखिल भारतीय जनवादी सांस्कृतिक सामाजिक मोर्चा से सम्बद्ध बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा का 9वॉं सम्मेलन छपरा के सारण-जनपद के गॉंव कोहड़ा-बाजार में भारी उत्साह एवं साहित्य-कला- »
शिवमूर्ति अगर कहीं जज रहे होते तो ज़्यादा अच्छा होता
बहुत सारे कहानीकार अपनी कहानियों में खुद को ‘हीरो‘ बनाते हैं। लेकिन शिवमूर्ति अपनी कहानियों में खुद को हीरो नहीं बनाते। हाँ, उन की कहानियाँ उन्हें हीरो बनाती हैं। उन की कहानियों का कौशल, उन क »

ये साली ज़िंदगी

शेहला मसूद हत्याकांड: धारा 164 के नाम पर सीबीआई को दिया धोखा
: तीन आरोपी गुनाह कबूलने के बहाने कोर्ट पहुंचे और खुद को बेकसूर बताया : इंदौर । मप्र की सियासी हलकों में धूम मचा देनेवाले आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड में सीआरपीसी की धारा 164 में इकबा »
सीबीआई माने ‘सियासी बंदोबस्त ऑफ इंडिया’
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सीबीआई को लोग सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन कहने के बजाय ‘सियासी बंदोबस्त ऑफ इंडिया’ कहने लगे हैं। चुनाव समाप्त हो जाने के बाद यूपी के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवा »
दारू पीकर पगला जाता है राजा चौधरी, अबकी जयपुर में गिरफ्तार
जयपुर : राजा चौधरी को मुंबई से तड़ीपार कर दिया गया लेकिन भाई सुधरा नहीं. वह दारू पीकर पगलाने की अपनी आदत से बाज नहीं आ रहा. राजा चौधरी को जयपुर पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. भोजपुरी फिल्मों के इस अभ »

चल मुसाफिर

Police Atrocities on the Farmers and Nature Based Communities on the Rise in Madhya Pradesh
: One Killed in Police Firing in Raisen; and 53 Arrested in Anuppur while protesting Land Acquisition : New Delhi, May 8th : Farmers and those dependent on the land and other natural resources are constantly at the receiving end of the police violence these days. Land conflicts are the order of the day and it seems they are here to stay given the corporates hunger for the land, water and forests for commercial exploitation and profit. We strongly oppose and condemn any such forceful acquisition »
निर्मल बाबा के बहाने हिन्दू धर्म पर निशाना क्यों?
: अपने गिरेबां में भी तो झांकिये : निर्मल बाबा महान हैं या गिरे हुये इन्सान, यह तो वही बता सकता है जो उनके सम्‍पर्क में आया हो या जिसने उन्हें आज़माया हो। पर उनके बहाने हिन्दू धर्म या सारे साधु-सन »
यमन में क्रान्ति की नेता है बत्तीस साल की उम्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाली पत्रकार
इस साल का जगजीवन राम स्मारक व्याख्यान यमन में सत्ता परिवर्तन की लड़ाई के आन्दोलन की नेता तवक्कुल कारमान देंगी. कारमान हमारे समय की बहुत बड़ी क्रान्तिकारी नेता हैं.  २०११ में कारमान को ३२ साल »

सुनिए-कहिए

एमिटी विश्‍वविद्याल में प्रवेश ना लें, नहीं तो लुट जाएंगे
नमस्कार यशवंत जी, मैं एक मीडिया स्टूडेंट रह चुका हूं. एक अच्छे सपने के साथ मैंने भी मीडिया संस्‍थान में प्रवेश लिया था, सोचा कि बहुत कुछ करूँगा. स्नातक करने के बाद एमिटी विश्वविद्यालय में प्रव »
Time for all institutions to launch self-corrective steps : NK Singh
Basic theories of political science suggest that as society grows economically and gets mature in democratic experiences, institutions become more tolerant to criticism and more libertarian in their approaches.  In Indian context too growing public consciousness, logic power and resultant aspiration have been putting pressure on the democratic institutions for better and honest performance. The net result is that all institutions are under constant scrutiny. »
पश्चिम बंगाल में वामपंथ का पूरा सच कभी नहीं पढ़ाया गया
भारत से वामपंथ को विदा करने की सही राह पश्चिम बंगाल की तेजतर्रार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पकड़ी है। ममता ने लम्बे संघर्ष के दौरान पश्चिम बंगाल की जनता को वामपंथ का कलुषित चेहरा दिखाया और उ »

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